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18 साल की एक लड़की एक दिन अपनी मां के पास गयी और तबियत ख़राब और जी मचलने की शिकायत करने लगी.
उसकी मां उसे लेकर डॉक्टर के पास पहुंची तो पाया की वो गर्भवती है, रोटी, पिटती, उसे कोसती हुई घर लेकर आई और बोली.
मां: "वो कौन है जिसका पाप तेरे पेट में पल रहा है जिसने ये कुकर्म किया है जल्दी से उसे यहाँ बुला नहीं तो तूजे जान से मार दूँगी"
लड़की ने रोते-रोते एक फ़ोन किया लगभग आधे घंटे बाद एक शानदार गाड़ी दरवाजे पर आकर रुकी,
उसमें से एक सुन्दर सा जवान लड़का निकला और अन्दर आकर सोफे पर बैठ गया और बोला.
लड़का: "मैं ही वही आदमी हूँ जिसकी वजह से आपको परेशानी हो रही है, मैं आप लोगो का अपराधी हूँ, लेकिन मैं उसका दंड भुगतने के लिए तैयार हूँ"
देखिये, मैं आपकी बेटी से शादी तो नहीं कर सकता, क्यूंकि उसके लिए मेरे पिताजी भी राजी नहीं होंगे,
पर मैं आपकी मदद कर सकता हूँ, मैं आपकी बेटी की सारी ज़िन्दगी की जिम्मेदारी लेता हूँ"
अगर उसके लड़की हुई तो मैं उसके नाम पांच करोड़ रुपये, एक बंगला, एक गाड़ी और एक फैक्ट्री लगवा दूंगा,
और अगर लड़का हुआ तो उसके नाम दस करोड़ रुपये, मुंबई और दिल्ली दोनों शहरों में एक-एक आलिशान हवेली और एक बहुत बड़ी फैक्ट्री बनवा दूंगा,
और अगर बदकिस्मती से गर्भपात हो गया तो..... तो आप ही बताइए मुझे क्या करना चाहिए?
लड़की का पिता जो चुपचाप उसकी बातें सुन रहा था, धीरे से उठा और लड़के का हाथ अपने हाथ में लेकर प्यार से बोला.
पिता: "बेटा, भगवान् ना करे अगर ऐसा हो भी जाये तो तुम दोबारा कोशिश कर के देख सकते हो
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जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया,
भूल ना पाऊँ उसे ऐसी निशानी दे गया.
उससे मैँ कुछ पा सकूँ,
ऐसी कहाँ उम्मीद थी,
गम भी वो शायद पराए, मेहरबानी दे गया,
उम्र भर दोहराऊंगा ऐसी कहानी दे गया,
सब हवाएं ले गया मेरी,समन्दर की कोई,
और मुझको एक कश्ती बाद बानी दे गया,
खैर मैँ प्यासा रहा पर उसने इतना तो किया,
मेरी पलकोँ की कतारोँ को वो पानी दे गया,
उम्र भर दोहराऊंगा ऐसी कहानी दे गया,
जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया